Bookseer

आप अभी जो हैं,
उसके लिए
चुनी किताबें।

रोज़ आइए या मौसम में एक बार। आपकी रुचि के लिए नहीं: आप इस समय जो जी रहे हैं उसके लिए।

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कहीं कोई किताब है जो आपके लिए लिखी गई है।

हो सकता है आपने उसका नाम भी न सुना हो। वह किसी सूची में नहीं है, और आपके मित्रों ने भी उसे नहीं पढ़ा।

क्या कोई किताब सचमुच ठीक समय पर आ सकती है?

शब्द वास्तविकता बदल देते हैं। एक शपथ विवाह रचती है; एक फ़ैसला, क़ैद; एक प्रार्थना, सांत्वना। सही शब्द, अगर सही पल पर पहुँचें, तो जीवन बदल सकते हैं।

किताब सही शब्दों की एक लंबी शृंखला है, जिसे किसी ने लिखा और उसकी क़ीमत अपने जीवन से चुकाई। डर के विरुद्ध शब्द। अहंकार के विरुद्ध। प्रेम के लिए, साहस के लिए, नई शुरुआत के लिए।

आप जो भी बोझ उठाए चल रहे हैं, आपसे पहले किसी ने उसे उठाया है, और उसके लिए शब्द खोज निकाले हैं। किताब को बस समय रहते आप तक पहुँचना है।

द्रष्टा ने सब कुछ पढ़ा है।

महान, अनदेखी, भुला दी गई।

उत्तर देने से पहले, वह पूछता है।

बहुत से प्रश्न, कोई भी किताबों के बारे में नहीं। रात में आपको क्या जगाए रखता है, आप किससे ईर्ष्या करते हैं, आप किससे बच रहे हैं।

यह किताब क्यों। आप क्यों। अभी क्यों।

तीन किताबें आती हैं, हर एक के साथ एक कारण जो आपको संबोधित है। कोई परिचय-पंक्ति नहीं: एक निदान और एक नुस्ख़ा।

दर्पण

The Remains of the Day

काज़ुओ इशिगुरो · 1989

स्टीवंस ने तीस साल एक ऐसे घर को दोषरहित सेवा दी जिसकी शान को वह अपनी शान समझता रहा, और इशिगुरो उससे यह कथा इतने धीमे स्वर में कहलवाते हैं कि सच बारिश की तरह चुपचाप आ पहुँचता है। आप भी वफ़ादार रहे हैं, किसी भूमिका के, किसी योजना के, अपने ही किसी पुराने संस्करण के। अंत के पास घाट पर एक अजनबी उससे कहता है कि शाम दिन का सबसे अच्छा हिस्सा होती है, और रोशनियाँ जल उठती हैं। किताब बंद करते ही आप जान लेंगे कि कौन-सी वफ़ादारी अब पूरी हुई।

मार्ग

सत्य के प्रयोग

मोहनदास करमचंद गांधी · 1927

एक आदमी बार-बार अपना बना-बनाया जीवन छोड़ता है और हर बार ख़ुद को नए सिरे से गढ़ता है, और यह सब ऐसी ईमानदारी से लिखता है जो अपने प्रति भी रियायत नहीं बरतती। एक रात वह पीटरमैरित्सबर्ग स्टेशन के ठंडे प्रतीक्षालय में बैठा है, डिब्बे से बाहर फेंका हुआ, और वहीं तय करता है कि लौटेगा नहीं, आगे जाएगा। आपने भी गठरी बाँध ली है, बस पहला स्टेशन बाक़ी है। यह किसी महापुरुष की मूर्ति नहीं, एक झिझकते, डरे हुए आदमी का हिसाब है जो फिर भी चल पड़ा। इसे पढ़कर आप देखेंगे कि रास्ता चलते-चलते ही बनता है।

खिड़की

The Summer Book

तूवे यानसन · 1972

फ़िनलैंड की खाड़ी का एक द्वीप, एक दादी, छह साल की बच्ची, एक लंबी गर्मी: यानसन छोटे-छोटे दिनों के एक मौसम से पूरी जीवन-दृष्टि रच देती हैं। एक अध्याय में दोनों पड़ोसी की नई कुटिया में सिर्फ़ इसलिए घुस जाती हैं कि उस पर ताला लगा है, और वह अपराध भी किसी तरह प्रेम का काम बन जाता है। यह किताब पार उतर जाने के बाद के लिए है, इस बात का प्रमाण कि अगला जीवन पुराने से बड़ा नहीं होना चाहिए, बस अधिक ईमानदारी से आपका होना चाहिए। इसे पहली धीमी शामों के लिए बचाकर रखिए। यह पढ़ने में वैसी ही लगती है जैसी वह जगह, जिसकी ओर आपने गठरी बाँधी है।

एक चित्र, तीन किताबों में।

पाठ आपका है, अपने पास रखने और आगे सौंपने के लिए। इसकी किताबें अपनी डायरी में सहेजिए; कार्ड उस मित्र के साथ साझा कीजिए जिसकी याद इसने दिलाई। कुछ आत्म-चित्र किताबों से बनते हैं।

तीन किताबें
आज मैं जो हूँ, उसके लिए।

आप इसे अब भी अंत कह रहे हैं। ज़रा ग़ौर से देखिए: आपने तो कहीं जाने की गठरी कब की बाँध ली है। ये तीनों उस राह को जानती हैं।

द्रष्टा आपमें क्या देखेगा? bookseer.app

समूचा विश्व साहित्य।

उपन्यास, दर्शन, संस्मरण, कविता, विज्ञान। कोई भी पुस्तक विक्रेता आपके पाठ में जगह पाने के लिए पैसा नहीं देता।

वह याद रखता है।

आपका दिया हर उत्तर और उसका दिया हर ग्रंथ सँभालकर रखा जाता है। अगला पाठ वहीं से आरंभ होता है जहाँ पिछला समाप्त हुआ था, और कोई पुस्तक दो बार नहीं आती।

एक जीवन की पुस्तकें, उसी क्रम में जिस क्रम में जीवन उन्हें माँगता है।

कोई खाता नहीं। कोई फ़ीड नहीं। कोई विज्ञापन नहीं। आपके उत्तर आपके नाम के बिना यात्रा करते हैं।

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