तीन किताबें आती हैं, हर एक के साथ एक कारण जो आपको संबोधित है। कोई परिचय-पंक्ति नहीं: एक निदान और एक नुस्ख़ा।
लौटिएसाझा कीजिए
दर्पण
The Remains of the Day
काज़ुओ इशिगुरो · 1989
स्टीवंस ने तीस साल एक ऐसे घर को दोषरहित सेवा दी जिसकी शान को वह अपनी शान समझता रहा, और इशिगुरो उससे यह कथा इतने धीमे स्वर में कहलवाते हैं कि सच बारिश की तरह चुपचाप आ पहुँचता है। आप भी वफ़ादार रहे हैं, किसी भूमिका के, किसी योजना के, अपने ही किसी पुराने संस्करण के। अंत के पास घाट पर एक अजनबी उससे कहता है कि शाम दिन का सबसे अच्छा हिस्सा होती है, और रोशनियाँ जल उठती हैं। किताब बंद करते ही आप जान लेंगे कि कौन-सी वफ़ादारी अब पूरी हुई।
मार्ग
सत्य के प्रयोग
मोहनदास करमचंद गांधी · 1927
एक आदमी बार-बार अपना बना-बनाया जीवन छोड़ता है और हर बार ख़ुद को नए सिरे से गढ़ता है, और यह सब ऐसी ईमानदारी से लिखता है जो अपने प्रति भी रियायत नहीं बरतती। एक रात वह पीटरमैरित्सबर्ग स्टेशन के ठंडे प्रतीक्षालय में बैठा है, डिब्बे से बाहर फेंका हुआ, और वहीं तय करता है कि लौटेगा नहीं, आगे जाएगा। आपने भी गठरी बाँध ली है, बस पहला स्टेशन बाक़ी है। यह किसी महापुरुष की मूर्ति नहीं, एक झिझकते, डरे हुए आदमी का हिसाब है जो फिर भी चल पड़ा। इसे पढ़कर आप देखेंगे कि रास्ता चलते-चलते ही बनता है।
खिड़की
The Summer Book
तूवे यानसन · 1972
फ़िनलैंड की खाड़ी का एक द्वीप, एक दादी, छह साल की बच्ची, एक लंबी गर्मी: यानसन छोटे-छोटे दिनों के एक मौसम से पूरी जीवन-दृष्टि रच देती हैं। एक अध्याय में दोनों पड़ोसी की नई कुटिया में सिर्फ़ इसलिए घुस जाती हैं कि उस पर ताला लगा है, और वह अपराध भी किसी तरह प्रेम का काम बन जाता है। यह किताब पार उतर जाने के बाद के लिए है, इस बात का प्रमाण कि अगला जीवन पुराने से बड़ा नहीं होना चाहिए, बस अधिक ईमानदारी से आपका होना चाहिए। इसे पहली धीमी शामों के लिए बचाकर रखिए। यह पढ़ने में वैसी ही लगती है जैसी वह जगह, जिसकी ओर आपने गठरी बाँधी है।